जलझूलनी एकादशी पर्व पर मंगलवार को उदयपुर देवली स्थित रामरेवाड़ी
उदयपुर. जलझूलनी एकादशी पर्व पर मंगलवार को शहर भर में धूमधाम से रामरेवाड़ियां निकलीं। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़े और भक्ति गीतों की धुनों पर भक्त बारी-बारी से रामरेवाड़ियों को कंधों पर रख झूम रहे थे। हर ओर आस्था की हिलोरें उठ रही थीं। वही उदयपुर में नीमच माता स्कीम देवली में स्थित राणा पुंजा लोक कला अकादमी (मार्शल आर्ट) गवरी चौक से रामरेवाड़ी पर बहुत ही मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। जिसमें लड़कियों द्वारा तलवार चलाना, लकड़ी चलना। लोक कला अकादमी का संचालन श्री फतहसिंह राठौड़ ओर श्री जगपाल सिंह राठौड़ करते है। यहाँ पर तलवार चलाना, लकड़ी चलाना, मुकदर, डांग पट्टा, उर्मी चलाना (नियुद्ध/ बिना शस्त्र के प्रतिबन्धी को परास्त करना सिखाया जाता है) इतिहास और संस्कृति के जानकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि मेवाड़ में रामरेवाड़ी निकालने की परंपरा महाराणा जगत सिंह के शासन काल में 1630 ई. के बाद बने वैष्णव मंदिरों से शुरू हुई थी। अधिकतर रामरेवाड़ियां पीछोला झील पहुंचती थीं। जल झूलनी एकादशी को पहले जल झीलन एकादशी कहते थे। यह जल स्नान का महापर्व है। न्यूज़ रिपोर्ट :- प्रवीण सोनी
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