समंद पूजन पुरातन काल की जल संरक्षण की एक परम्परा

जय चारभुजा री. समंद पूजन पुरातन काल की जल संरक्षण की एक परम्परा हैँ, इसकी रस्म क्रम में वर्षा ऋतू के पहले वैशाख माह में जनानाओ द्वारा गांव का पाणी गांव में रखने हेतु पाळ बाँधी जाति हैँ, यह परम्परा उसी का एक रूप हैँ जिसे आजकल सरकारे गांव का पाणी गांव में के तहत तलाब और एनीकट बनवाती हैँ जिसे पहले" हिम(सीमा )का पाणी हिमाड़े" में कहा जाता था,आजकल वर्षा के बाद समंद भरने पर समाजिक सिरदारो की उपस्थिति में स्नेह भोज का आयोजन रखा जाता हैँ,इसमें गांव की सभी बहुओ को अपने जीवन में ईस क्रम से गुजरने का रीवाज हैँ,इसी क्रम में महुड़ा और मरतडी में दशकों बाद ये आयोजन हुआ, ईस इतिहासिक आयोजन के गवाह हज़ारो की संख्या में समाजिक सिरदार बने, यह आयोजन मेवाड़ चौरासी और प्रदेश के सबसे बड़े आयोजन मेसे एक माने गए हैँ...

Sep 30, 2023 - 18:36
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समंद पूजन पुरातन काल की जल संरक्षण की एक परम्परा

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